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सहीह बुख़ारी

नंबर 4951

नंबर 4951किताब 65, नंबर 473
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، غُنْدَرٌ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنِ الأَسْوَدِ بْنِ قَيْسٍ، قَالَ سَمِعْتُ جُنْدَبًا الْبَجَلِيَّ، قَالَتِ امْرَأَةٌ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا أُرَى صَاحِبَكَ إِلاَّ أَبْطَأَكَ‏.‏ فَنَزَلَتْ ‏{‏مَا وَدَّعَكَ رَبُّكَ وَمَا قَلَى‏}‏
Narrated Jundub Al-Bajali:A lady said, "O Allah's Messenger (ﷺ)! I see that your friend has delayed. (in conveying Qur'an) to you." So there was revealed: 'Your Lord (O Muhammad) has neither forsaken you, not hated you

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 65 · Prophetic Commentary on the Qur'an (Tafseer of the Prophet (pbuh))

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।