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सहीह बुख़ारी

नंबर 4927

नंबर 4927किताब 65, नंबर 447
حَدَّثَنَا الْحُمَيْدِيُّ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ أَبِي عَائِشَةَ ـ وَكَانَ ثِقَةً ـ عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم إِذَا نَزَلَ عَلَيْهِ الْوَحْىُ حَرَّكَ بِهِ لِسَانَهُ ـ وَوَصَفَ سُفْيَانُ ـ يُرِيدُ أَنْ يَحْفَظَهُ فَأَنْزَلَ اللَّهُ ‏{‏لاَ تُحَرِّكْ بِهِ لِسَانَكَ لِتَعْجَلَ بِهِ‏}‏
Narrated Ibn `Abbas:The Prophet (ﷺ) used to move his tongue when the divine Inspiration was being revealed to him. (Sufyan, a subnarrator, demonstrated (how the Prophet (ﷺ) used to move his lips) and added. "In order to memorize it." So Allah revealed: "Move not your tongue concerning (the Qur'an) to make haste therewith

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 65 · Prophetic Commentary on the Qur'an (Tafseer of the Prophet (pbuh))

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।