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सहीह बुख़ारी

नंबर 4914

नंबर 4914किताब 65, नंबर 434
حَدَّثَنَا عَلِيٌّ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، قَالَ سَمِعْتُ عُبَيْدَ بْنَ حُنَيْنٍ، قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما ـ يَقُولُ أَرَدْتُ أَنْ أَسْأَلَ عُمَرَ فَقُلْتُ يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ مَنِ الْمَرْأَتَانِ اللَّتَانِ تَظَاهَرَتَا عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَمَا أَتْمَمْتُ كَلاَمِي حَتَّى قَالَ عَائِشَةُ وَحَفْصَةُ‏.‏
Narrated Ibn `Abbas:I intended to ask `Umar so I said, "Who were those two ladies who tried to back each other against the Prophet?" I hardly finished my speech when he said, They were `Aisha and Hafsa

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 65 · Prophetic Commentary on the Qur'an (Tafseer of the Prophet (pbuh))

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।