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सहीह बुख़ारी

नंबर 4893

नंबर 4893किताब 65, नंबर 413
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا وَهْبُ بْنُ جَرِيرٍ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبِي قَالَ، سَمِعْتُ الزُّبَيْرَ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، فِي قَوْلِهِ تَعَالَى ‏{‏وَلاَ يَعْصِينَكَ فِي مَعْرُوفٍ‏}‏ قَالَ إِنَّمَا هُوَ شَرْطٌ شَرَطَهُ اللَّهُ لِلنِّسَاءِ‏.‏
Narrated Ibn `Abbas:Regarding the saying of Allah: 'And they will not disobey you in any just matter.' (60.12) That was one of the conditions which Allah imposed on The believing) women (who came to take the oath of allegiance to the Prophet)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 65 · Prophetic Commentary on the Qur'an (Tafseer of the Prophet (pbuh))

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।