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सहीह बुख़ारी

नंबर 4860

नंबर 4860किताब 65, नंबर 381
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ، أَخْبَرَنَا هِشَامُ بْنُ يُوسُفَ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ حُمَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ حَلَفَ فَقَالَ فِي حَلِفِهِ وَاللاَّتِ وَالْعُزَّى‏.‏ فَلْيَقُلْ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ‏.‏ وَمَنْ قَالَ لِصَاحِبِهِ تَعَالَ أُقَامِرْكَ‏.‏ فَلْيَتَصَدَّقْ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Huraira:Allah's Messenger (ﷺ) said, "Whomever takes an oath in which he mentions Lat and `Uzza (forgetfully), should say: None has the right to be worshipped but Allah, and whoever says to his companion. 'Come along, let us gamble' must give alms (as an expiation)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 65 · Prophetic Commentary on the Qur'an (Tafseer of the Prophet (pbuh))

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।