सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 4836

नंबर 4836किताब 65, नंबर 357
حَدَّثَنَا صَدَقَةُ بْنُ الْفَضْلِ، أَخْبَرَنَا ابْنُ عُيَيْنَةَ، حَدَّثَنَا زِيَادٌ، أَنَّهُ سَمِعَ الْمُغِيرَةَ، يَقُولُ قَامَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم حَتَّى تَوَرَّمَتْ قَدَمَاهُ فَقِيلَ لَهُ غَفَرَ اللَّهُ لَكَ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِكَ وَمَا تَأَخَّرَ قَالَ ‏ "‏ أَفَلاَ أَكُونُ عَبْدًا شَكُورًا ‏"‏‏.‏
Narrated Al-Mughira:The Prophet (ﷺ) used to offer night prayers till his feet became swollen. Somebody said, to him," "Allah has forgiven you, your faults of the past and those to follow." On that, he said, "Shouldn't I be a thankful slave of Allah)?

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 65 · Prophetic Commentary on the Qur'an (Tafseer of the Prophet (pbuh))

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।