सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 4832

नंबर 4832किताब 65, नंबर 353
حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ مُحَمَّدٍ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ، أَخْبَرَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ أَبِي الْمُزَرَّدِ، بِهَذَا قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ وَاقْرَءُوا إِنْ شِئْتُمْ ‏{‏فَهَلْ عَسَيْتُمْ‏}‏
Narrated Muawiya bin Abi Al-Muzarrad:Allah's Messenger (ﷺ), said, "Recite if you wish: Would you then if you were given the authority

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 65 · Prophetic Commentary on the Qur'an (Tafseer of the Prophet (pbuh))

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।