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सहीह बुख़ारी

नंबर 4790

नंबर 4790किताब 65, नंबर 312
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، عَنْ يَحْيَى، عَنْ حُمَيْدٍ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ قَالَ عُمَرُ ـ رضى الله عنه ـ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ، يَدْخُلُ عَلَيْكَ الْبَرُّ وَالْفَاجِرُ، فَلَوْ أَمَرْتَ أُمَّهَاتِ الْمُؤْمِنِينَ بِالْحِجَابِ، فَأَنْزَلَ اللَّهُ آيَةَ الْحِجَابِ‏.‏
Narrated `Umar:I said, "O Allah's Messenger (ﷺ)! Good and bad persons enter upon you, so I suggest that you order the mothers of the Believers (i.e. your wives) to observe veils." Then Allah revealed the Verses of Al- Hijab

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 65 · Prophetic Commentary on the Qur'an (Tafseer of the Prophet (pbuh))

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।