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सहीह बुख़ारी

नंबर 4787

नंबर 4787किताब 65, नंबर 309
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحِيمِ، حَدَّثَنَا مُعَلَّى بْنُ مَنْصُورٍ، عَنْ حَمَّادِ بْنِ زَيْدٍ، حَدَّثَنَا ثَابِتٌ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ ـ رضى الله عنه ـ أَنَّ هَذِهِ، الآيَةَ ‏{‏وَتُخْفِي فِي نَفْسِكَ مَا اللَّهُ مُبْدِيهِ‏}‏ نَزَلَتْ فِي شَأْنِ زَيْنَبَ ابْنَةِ جَحْشٍ وَزَيْدِ بْنِ حَارِثَةَ‏.‏
Narrated Anas bin Malik:The Verse: 'But you did hide in your mind that which Allah was about to make manifest.' (33.37) was revealed concerning Zainab bint Jahsh and Zaid bin Haritha

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 65 · Prophetic Commentary on the Qur'an (Tafseer of the Prophet (pbuh))

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।