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सहीह बुख़ारी

नंबर 4782

नंबर 4782किताब 65, नंबर 304
حَدَّثَنَا مُعَلَّى بْنُ أَسَدٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ الْمُخْتَارِ، حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ عُقْبَةَ، قَالَ حَدَّثَنِي سَالِمٌ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ ـ رضى الله عنهما ـ أَنَّ زَيْدَ بْنَ حَارِثَةَ، مَوْلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مَا كُنَّا نَدْعُوهُ إِلاَّ زَيْدَ ابْنَ مُحَمَّدٍ حَتَّى نَزَلَ الْقُرْآنُ ‏{‏ادْعُوهُمْ لآبَائِهِمْ هُوَ أَقْسَطُ عِنْدَ اللَّهِ‏}‏‏.‏
Narrated `Abdullah bin `Umar:We used not to call Zaid bin Haritha the freed slave of Allah's Messenger (ﷺ) except Zaid bin Muhammad till the Qur'anic Verse was revealed: "Call them (adopted sons) by (the names of) their fathers. That is more than just in the Sight of Allah

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 65 · Prophetic Commentary on the Qur'an (Tafseer of the Prophet (pbuh))

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।