وَقَالَ أَحْمَدُ بْنُ شَبِيبٍ حَدَّثَنَا أَبِي، عَنْ يُونُسَ، قَالَ ابْنُ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ يَرْحَمُ اللَّهُ نِسَاءَ الْمُهَاجِرَاتِ الأُوَلَ، لَمَّا أَنْزَلَ اللَّهُ {وَلْيَضْرِبْنَ بِخُمُرِهِنَّ عَلَى جُيُوبِهِنَّ} شَقَّقْنَ مُرُوطَهُنَّ فَاخْتَمَرْنَ بِها.
Narrated `Aishah:May Allah bestow His Mercy on the early emigrant women. When Allah revealed: "... and to draw their veils all over their Juyubihinna (i.e., their bodies, faces, necks and bosoms)..." (V.24:31) they tore their Murut (woolen dresses or waist-binding clothes or aprons etc.) and covered their heads and faces with those torn Muruts
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।