सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 4754

नंबर 4754किताब 65, नंबर 276
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ بْنُ عَبْدِ الْمَجِيدِ، حَدَّثَنَا ابْنُ عَوْنٍ، عَنِ الْقَاسِمِ، أَنَّ ابْنَ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنه ـ اسْتَأْذَنَ عَلَى عَائِشَةَ نَحْوَهُ‏.‏ وَلَمْ يَذْكُرْ نِسْيًا مَنْسِيًّا‏.‏
Narrated Al-Qasim:Ibn `Abbas asked `Aisha's permission to enter. Al-Qasim then narrated the whole Hadith (as in 277) but did not mention: "Would that I had been forgotten and out of sight

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 65 · Prophetic Commentary on the Qur'an (Tafseer of the Prophet (pbuh))

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।