सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 4692

नंबर 4692किताब 65, नंबर 214
حَدَّثَنِي أَحْمَدُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ عُمَرَ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ سُلَيْمَانَ، عَنْ أَبِي وَائِلٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ، قَالَ هَيْتَ لَكَ قَالَ وَإِنَّمَا نَقْرَؤُهَا كَمَا عُلِّمْنَاهَا ‏{‏مَثْوَاهُ‏}‏ مُقَامُهُ ‏{‏أَلْفَيَا‏}‏ وَجَدَا ‏{‏أَلْفَوْا آبَاءَهُمْ‏}‏ ‏{‏أَلْفَيْنَا‏}‏ وَعَنِ ابْنِ مَسْعُودٍ ‏{‏بَلْ عَجِبْتَ وَيَسْخَرُونَ‏}‏
Narrated Abu Wail:`Abdullah bin Mas`ud recited "Haita laka (Come you)," and added, "We recite it as we were taught it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 65 · Prophetic Commentary on the Qur'an (Tafseer of the Prophet (pbuh))

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।