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सहीह बुख़ारी

नंबर 4661

नंबर 4661किताब 65, नंबर 183
وَقَالَ أَحْمَدُ بْنُ شَبِيبِ بْنِ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا أَبِي، عَنْ يُونُسَ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ خَالِدِ بْنِ أَسْلَمَ، قَالَ خَرَجْنَا مَعَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ فَقَالَ هَذَا قَبْلَ أَنْ تُنْزَلَ، الزَّكَاةُ، فَلَمَّا أُنْزِلَتْ جَعَلَهَا اللَّهُ طُهْرًا لِلأَمْوَالِ‏.‏
Narrated Khãlid bin Aslam:We went out with 'Abdullãh bin 'Umar and he said, "This (Verse) was revealed before the prescription of Zakat, and when Zakãt was prescribed, Allah made it a means of purifying one's wealth

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 65 · Prophetic Commentary on the Qur'an (Tafseer of the Prophet (pbuh))

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।