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सहीह बुख़ारी

नंबर 4639

नंबर 4639किताब 65, नंबर 161
حَدَّثَنَا مُسْلِمٌ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ، عَنْ عَمْرِو بْنِ حُرَيْثٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ زَيْدٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ الْكَمْأَةُ مِنَ الْمَنِّ وَمَاؤُهَا شِفَاءُ الْعَيْنِ ‏"‏‏.‏
Narrated Sa`id Ibn Zaid:The Prophet (ﷺ) said, "Al-Kam'a is like the Manna (sweet resin or gum) (in that it grows naturally without human care) and its water is a cure for the eye diseases

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 65 · Prophetic Commentary on the Qur'an (Tafseer of the Prophet (pbuh))

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।