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सहीह बुख़ारी

नंबर 4637

नंबर 4637किताब 65, नंबर 159
حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ، عَنْ أَبِي وَائِلٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ قُلْتُ أَنْتَ سَمِعْتَ هَذَا مِنْ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ نَعَمْ، وَرَفَعَهُ‏.‏ قَالَ ‏ "‏ لاَ أَحَدَ أَغْيَرُ مِنَ اللَّهِ، فَلِذَلِكَ حَرَّمَ الْفَوَاحِشَ مَا ظَهَرَ مِنْهَا وَمَا بَطَنَ، وَلاَ أَحَدَ أَحَبُّ إِلَيْهِ الْمِدْحَةُ مِنَ اللَّهِ، فَلِذَلِكَ مَدَحَ نَفْسَهُ ‏"‏‏.‏
Narrated `Abdullah bin Mas`ud:Allah's Messenger (ﷺ) said, "None has more sense of ghaira than Allah, and for this He has forbidden shameful sins whether committed openly or secretly, and none loves to be praised more than Allah does, and this is why He Praises Himself

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 65 · Prophetic Commentary on the Qur'an (Tafseer of the Prophet (pbuh))

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।