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सहीह बुख़ारी

नंबर 4629

नंबर 4629किताब 65, नंबर 151
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عَدِيٍّ، عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ سُلَيْمَانَ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ عَلْقَمَةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ لَمَّا نَزَلَتْ ‏{‏وَلَمْ يَلْبِسُوا إِيمَانَهُمْ بِظُلْمٍ‏}‏ قَالَ أَصْحَابُهُ وَأَيُّنَا لَمْ يَظْلِمْ فَنَزَلَتْ ‏{‏إِنَّ الشِّرْكَ لَظُلْمٌ عَظِيمٌ‏}‏
Narrated `Abdullah:When:"...and confuse not their belief with wrong." (6.82) was revealed, the Prophet's companions said, "Which of us has not done wrong?" Then there was revealed:-- "Verily joining others in worship with Allah is a tremendous wrong indeed

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 65 · Prophetic Commentary on the Qur'an (Tafseer of the Prophet (pbuh))

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।