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सहीह बुख़ारी

नंबर 4612

नंबर 4612किताब 65, नंबर 134
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يُوسُفَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ، عَنِ الشَّعْبِيِّ، عَنْ مَسْرُوقٍ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ مَنْ حَدَّثَكَ أَنَّ مُحَمَّدًا صلى الله عليه وسلم كَتَمَ شَيْئًا مِمَّا أُنْزِلَ عَلَيْهِ، فَقَدْ كَذَبَ، وَاللَّهُ يَقُولُ ‏{‏يَا أَيُّهَا الرَّسُولُ بَلِّغْ مَا أُنْزِلَ إِلَيْكَ‏}‏ الآيَةَ‏.‏
Narrated `Aisha:Whoever tells that Muhammad concealed part of what was revealed to him, is a liar, for Allah says:-- "O Apostle (Muhammad)! Proclaim (the Message) which has been sent down to you from your Lord

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 65 · Prophetic Commentary on the Qur'an (Tafseer of the Prophet (pbuh))

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।