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सहीह बुख़ारी

नंबर 4593

नंबर 4593किताब 65, नंबर 115
حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ عُمَرَ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنِ الْبَرَاءِ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ لَمَّا نَزَلَتْ ‏{‏لاَ يَسْتَوِي الْقَاعِدُونَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ‏}‏ دَعَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم زَيْدًا فَكَتَبَهَا، فَجَاءَ ابْنُ أُمِّ مَكْتُومٍ فَشَكَا ضَرَارَتَهُ، فَأَنْزَلَ اللَّهُ ‏{‏غَيْرَ أُولِي الضَّرَرِ‏}‏
Narrated Al-Bara:When the Verse:-- "Not equal are those of the believers who sit (at home)" (4.95) was revealed, Allah's Apostle called for Zaid who wrote it. In the meantime Ibn Um Maktum came and complained of his blindness, so Allah revealed: "Except those who are disabled (by injury or are blind or lame..." etc)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 65 · Prophetic Commentary on the Qur'an (Tafseer of the Prophet (pbuh))

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।