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सहीह बुख़ारी

नंबर 4551

नंबर 4551किताब 65, नंबर 73
حَدَّثَنَا عَلِيٌّ ـ هُوَ ابْنُ أَبِي هَاشِمٍ ـ سَمِعَ هُشَيْمًا، أَخْبَرَنَا الْعَوَّامُ بْنُ حَوْشَبٍ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي أَوْفَى ـ رضى الله عنهما ـ أَنَّ رَجُلاً، أَقَامَ سِلْعَةً فِي السُّوقِ فَحَلَفَ فِيهَا لَقَدْ أَعْطَى بِهَا مَا لَمْ يُعْطَهُ‏.‏ لِيُوقِعَ فِيهَا رَجُلاً مِنَ الْمُسْلِمِينَ، فَنَزَلَتْ ‏{‏إِنَّ الَّذِينَ يَشْتَرُونَ بِعَهْدِ اللَّهِ وَأَيْمَانِهِمْ ثَمَنًا قَلِيلاً‏}‏ إِلَى آخِرِ الآيَةِ‏.‏
Narrated `Abdullah bin Abu `Aufa:A man displayed some merchandise in the market and took an oath that he had been offered a certain price for it while in fact he had not, in order to cheat a man from the Muslims. So then was revealed:-- "Verily! Those who purchase a small gain at the cost of Allah's Covenant and their oaths

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 65 · Prophetic Commentary on the Qur'an (Tafseer of the Prophet (pbuh))

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।