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सहीह बुख़ारी

नंबर 4546

नंबर 4546किताब 65, नंबर 69
حَدَّثَنِي إِسْحَاقُ، أَخْبَرَنَا رَوْحٌ، أَخْبَرَنَا شُعْبَةُ، عَنْ خَالِدٍ الْحَذَّاءِ، عَنْ مَرْوَانَ الأَصْفَرِ، عَنْ رَجُلٍ، مِنْ أَصْحَابِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ أَحْسِبُهُ ابْنَ عُمَرَ ـ ‏{‏إِنْ تُبْدُوا مَا فِي أَنْفُسِكُمْ أَوْ تُخْفُوهُ‏}‏ قَالَ نَسَخَتْهَا الآيَةُ الَّتِي بَعْدَهَا‏.‏
Narrated Marwan Al-Asfar:A man from the companions of Allah's Messenger (ﷺ) who I think, was Ibn `Umar said, "The Verse:-- "Whether you show what is in your minds or conceal it...." was abrogated by the Verse following it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 65 · Prophetic Commentary on the Qur'an (Tafseer of the Prophet (pbuh))

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।