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सहीह बुख़ारी

नंबर 4507

नंबर 4507किताब 65, नंबर 34
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا بَكْرُ بْنُ مُضَرَ، عَنْ عَمْرِو بْنِ الْحَارِثِ، عَنْ بُكَيْرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ يَزِيدَ، مَوْلَى سَلَمَةَ بْنِ الأَكْوَعِ عَنْ سَلَمَةَ، قَالَ لَمَّا نَزَلَتْ ‏{‏وَعَلَى الَّذِينَ يُطِيقُونَهُ فِدْيَةٌ طَعَامُ مِسْكِينٍ‏}‏ كَانَ مَنْ أَرَادَ أَنْ يُفْطِرَ وَيَفْتَدِيَ حَتَّى نَزَلَتِ الآيَةُ الَّتِي بَعْدَهَا فَنَسَخَتْهَا‏.‏ مَاتَ بُكَيْرٌ قَبْلَ يَزِيدَ‏.‏
Narrated Salama:When the Divine Revelation: "For those who can fast, they had a choice to either fast, or feed a poor for every day," (2.184) was revealed, it was permissible for one to give a ransom and give up fasting, till the Verse succeeding it was revealed and abrogated it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 65 · Prophetic Commentary on the Qur'an (Tafseer of the Prophet (pbuh))

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।