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सहीह बुख़ारी

नंबर 4450

नंबर 4450किताब 64, नंबर 470
حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، قَالَ حَدَّثَنِي سُلَيْمَانُ بْنُ بِلاَلٍ، حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عُرْوَةَ، أَخْبَرَنِي أَبِي، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَسْأَلُ فِي مَرَضِهِ الَّذِي مَاتَ فِيهِ يَقُولَ ‏ "‏ أَيْنَ أَنَا غَدًا أَيْنَ أَنَا غَدًا ‏"‏ يُرِيدُ يَوْمَ عَائِشَةَ، فَأَذِنَ لَهُ أَزْوَاجُهُ يَكُونُ حَيْثُ شَاءَ، فَكَانَ فِي بَيْتِ عَائِشَةَ حَتَّى مَاتَ عِنْدَهَا، قَالَتْ عَائِشَةُ فَمَاتَ فِي الْيَوْمِ الَّذِي كَانَ يَدُورُ عَلَىَّ فِيهِ فِي بَيْتِي، فَقَبَضَهُ اللَّهُ وَإِنَّ رَأْسَهُ لَبَيْنَ نَحْرِي وَسَحْرِي، وَخَالَطَ رِيقُهُ رِيقِي ـ ثُمَّ قَالَتْ ـ دَخَلَ عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ أَبِي بَكْرٍ وَمَعَهُ سِوَاكٌ يَسْتَنُّ بِهِ فَنَظَرَ إِلَيْهِ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقُلْتُ لَهُ أَعْطِنِي هَذَا السِّوَاكَ يَا عَبْدَ الرَّحْمَنِ‏.‏ فَأَعْطَانِيهِ فَقَضِمْتُهُ، ثُمَّ مَضَغْتُهُ فَأَعْطَيْتُهُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَاسْتَنَّ بِهِ وَهْوَ مُسْتَنِدٌ إِلَى صَدْرِي‏.‏
आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपनी उस बीमारी के दिनों में, जिसमें आपकी मृत्यु हुई, पूछते थेः "मैं कल कहाँ रहूँगा? मैं कल कहाँ रहूँगा?" दरअसल, आप आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) के यहाँ ठहरना चाहते थे। अतः, आपकी पत्नियों ने आपको जहाँ चाहें, वहाँ ठहरने की अनुमति दे दी। इस तरह आप आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) ही के घर में रहे और उन्हीं के यहाँ प्राण त्यागा। आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैंः आपकी मृत्यु मेरी बारी के दिन और मेरे घर में हुई। अल्लाह ने आपको उठाया, तो आपका सर मेरी गर्दन और मेरे पेट के बीच में था और आपका लुआब मेरे लुआब से मिश्रित हो चुका था। आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) फिर कहती हैंः अब्दुर्रहमान बिन अबु-बकर एक मिसवाक लेकर मिसवाक करते हुए आए, तो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उनकी ओर देखा। अतः, मैंने उनसे कहाः ऐ अब्दुर्रहमान, मुझे यह मिसवाक दे दो। उन्होंने मुझे मिसवाक दे दी, तो मैंने उसे काटा, अपने दाँतों से चबाकर नरम किया और अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को बढ़ा दिया। सो, आपने उससे मिसवाक किया। उस समय आप मेरे सीने पर टेक लगाए हुए थे।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।