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सहीह बुख़ारी

नंबर 4446

नंबर 4446किताब 64, नंबर 466
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ، حَدَّثَنَا اللَّيْثُ، قَالَ حَدَّثَنِي ابْنُ الْهَادِ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْقَاسِمِ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ مَاتَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم وَإِنَّهُ لَبَيْنَ حَاقِنَتِي وَذَاقِنَتِي، فَلاَ أَكْرَهُ شِدَّةَ الْمَوْتِ لأَحَدٍ أَبَدًا بَعْدَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم‏.‏
Narrated `Aisha:The Prophet (ﷺ) died while he was between my chest and chin, so I never dislike the death agony for anyone after the Prophet

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।