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सहीह बुख़ारी

नंबर 4440

नंबर 4440किताब 64, नंबर 461
حَدَّثَنَا مُعَلَّى بْنُ أَسَدٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُخْتَارٍ، حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عُرْوَةَ، عَنْ عَبَّادِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ، أَنَّ عَائِشَةَ، أَخْبَرَتْهُ أَنَّهَا، سَمِعَتِ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم وَأَصْغَتْ إِلَيْهِ قَبْلَ أَنْ يَمُوتَ، وَهْوَ مُسْنِدٌ إِلَىَّ ظَهْرَهُ يَقُولُ ‏ "‏ اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي وَارْحَمْنِي، وَأَلْحِقْنِي بِالرَّفِيقِ ‏"‏‏.‏
Narrated `Aisha:I heard the Prophet (ﷺ) and listened to him before his death while he was leaning his back on me and saying, "O Allah! Forgive me, and bestow Your Mercy on me, and let me meet the (highest) companions (of the Hereafter)." (See the Qur'an (4:69) and Hadith

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।