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सहीह बुख़ारी

नंबर 4404

नंबर 4404किताब 64, नंबर 426
حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ خَالِدٍ، حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ، حَدَّثَنَا أَبُو إِسْحَاقَ، قَالَ حَدَّثَنِي زَيْدُ بْنُ أَرْقَمَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم غَزَا تِسْعَ عَشْرَةَ غَزْوَةً، وَأَنَّهُ حَجَّ بَعْدَ مَا هَاجَرَ حَجَّةً وَاحِدَةً لَمْ يَحُجَّ بَعْدَهَا حَجَّةَ الْوَدَاعِ‏.‏ قَالَ أَبُو إِسْحَاقَ وَبِمَكَّةَ أُخْرَى‏.‏
Narrated Zaid bin Arqam:The Prophet (ﷺ) fought nineteen Ghazwas and performed only one Hajj after he migrated (to Medina), and did not perform another Hajj after it, and that was Hajj-ul-Wada`,' Abu 'Is-haq said, "He performed when he was in Mecca

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।