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सहीह बुख़ारी

नंबर 4364

नंबर 4364किताब 64, नंबर 390
حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ رَجَاءٍ، حَدَّثَنَا إِسْرَائِيلُ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنِ الْبَرَاءِ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ آخِرُ سُورَةٍ نَزَلَتْ كَامِلَةً بَرَاءَةٌ، وَآخِرُ سُورَةٍ نَزَلَتْ خَاتِمَةُ سُورَةِ النِّسَاءِ ‏{‏يَسْتَفْتُونَكَ قُلِ اللَّهُ يُفْتِيكُمْ فِي الْكَلاَلَةِ‏}‏
Narrated Al-Bara:The last Sura which was revealed in full was Baraa (i.e. Sura-at-Tauba), and the last Sura (i.e. part of a Sura) which was revealed was the last Verses of Sura-an-Nisa':-- "They ask you for a legal decision. Say: Allah directs (thus) About those who have No descendants or ascendants As heirs

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।