حَدَّثَنَا أَبُو النُّعْمَانِ، حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، حَدَّثَنَا أَيُّوبُ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ بَعَثَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم سَرِيَّةً قِبَلَ نَجْدٍ، فَكُنْتُ فِيهَا، فَبَلَغَتْ سِهَامُنَا اثْنَىْ عَشَرَ بَعِيرًا، وَنُفِّلْنَا بَعِيرًا بَعِيرًا، فَرَجَعْنَا بِثَلاَثَةَ عَشَرَ بَعِيرًا.
Narrated Ibn `Umar:The Prophet (ﷺ) sent a Sariya towards Najd and I was in it, and our share from the booty amounted to twelve camels each, and we were given an additional camel each. So we returned with thirteen camels each
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।