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सहीह बुख़ारी

नंबर 4311

नंबर 4311किताब 64, नंबर 342
حَدَّثَنِي إِسْحَاقُ بْنُ يَزِيدَ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَمْزَةَ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو عَمْرٍو الأَوْزَاعِيُّ، عَنْ عَبْدَةَ بْنِ أَبِي لُبَابَةَ، عَنْ مُجَاهِدِ بْنِ جَبْرٍ الْمَكِّيِّ، أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ ـ رضى الله عنهما ـ كَانَ يَقُولُ لاَ هِجْرَةَ بَعْدَ الْفَتْحِ‏.‏
Narrated Mujahid bin Jabr:`Abdullah bin `Umar used to say, "There is no migration after the Conquest (of Mecca)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।