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सहीह बुख़ारी

नंबर 4308

नंबर 4308किताब 64, नंबर 339
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَبِي بَكْرٍ، حَدَّثَنَا الْفُضَيْلُ بْنُ سُلَيْمَانَ، حَدَّثَنَا عَاصِمٌ، عَنْ أَبِي عُثْمَانَ النَّهْدِيِّ، عَنْ مُجَاشِعِ بْنِ مَسْعُودٍ، انْطَلَقْتُ بِأَبِي مَعْبَدٍ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم لِيُبَايِعَهُ عَلَى الْهِجْرَةِ، قَالَ ‏ "‏ مَضَتِ الْهِجْرَةُ لأَهْلِهَا، أُبَايِعُهُ عَلَى الإِسْلاَمِ وَالْجِهَادِ." فَلَقِيتُ أَبَا مَعْبَدٍ فَسَأَلْتُهُ فَقَالَ صَدَقَ مُجَاشِعٌ‏.‏ وَقَالَ خَالِدٌ عَنْ أَبِي عُثْمَانَ عَنْ مُجَاشِعٍ أَنَّهُ جَاءَ بِأَخِيهِ مُجَالِدٍ‏.‏
Narrated Mujashi bin Masud:I took Abu Mabad to the Prophet (ﷺ) in order that he might give him the pledge of allegiance for migration. The Prophet (ﷺ) said, "Migration has gone to its people, but I take the pledge from him (i.e. Abu Mabad) for Islam and Jihad

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।