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सहीह बुख़ारी

नंबर 4301

नंबर 4301किताब 64, नंबर 334
حَدَّثَنِي إِبْرَاهِيمُ بْنُ مُوسَى، أَخْبَرَنَا هِشَامٌ، عَنْ مَعْمَرٍ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ سُنَيْنٍ أَبِي جَمِيلَةَ، قَالَ أَخْبَرَنَا وَنَحْنُ، مَعَ ابْنِ الْمُسَيَّبِ قَالَ وَزَعَمَ أَبُو جَمِيلَةَ أَنَّهُ أَدْرَكَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم، وَخَرَجَ مَعَهُ عَامَ الْفَتْحِ‏.‏
Narrated Az-Zuhri:While we were in the company of Ibn Al-Musaiyab, Sunain Abi Jamila informed us (a Hadith), Abu Jamila said that he lived during the lifetime of the Prophet (ﷺ) and that he had accompanied him ( to Mecca) during the year of the Conquest (of Mecca)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।