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सहीह बुख़ारी

नंबर 4285

नंबर 4285किताब 64, नंबर 318
حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ، أَخْبَرَنَا ابْنُ شِهَابٍ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم حِينَ أَرَادَ حُنَيْنًا ‏ "‏ مَنْزِلُنَا غَدًا إِنْ شَاءَ اللَّهُ بِخَيْفِ بَنِي كِنَانَةَ، حَيْثُ تَقَاسَمُوا عَلَى الْكُفْرِ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Huraira:When Allah's Messenger (ﷺ) intended to carry on the Ghazwa of Hunain, he said, "Tomorrow, if Allah wished, our encamping) plaice will be Khaif Bani Kinana where (the infidels) took an oath to be loyal to Heathenism

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।