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सहीह बुख़ारी

नंबर 4259

नंबर 4259किताब 64, नंबर 293
وَزَادَ ابْنُ إِسْحَاقَ حَدَّثَنِي ابْنُ أَبِي نَجِيحٍ، وَأَبَانُ بْنُ صَالِحٍ، عَنْ عَطَاءٍ، وَمُجَاهِدٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ تَزَوَّجَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم مَيْمُونَةَ فِي عُمْرَةِ الْقَضَاءِ‏.‏
Ibn `Abbas added:The Prophet married Maimuna during the `Umrat-al-Qada' (i.e. the `Umra performed in lieu of the `Umra which the Prophet (ﷺ) could not perform because the pagans, prevented him to perform that `Umra

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।