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सहीह बुख़ारी

नंबर 4233

नंबर 4233किताब 64, नंबर 271
حَدَّثَنِي إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، سَمِعَ حَفْصَ بْنَ غِيَاثٍ، حَدَّثَنَا بُرَيْدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ أَبِي بُرْدَةَ، عَنْ أَبِي مُوسَى، قَالَ قَدِمْنَا عَلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بَعْدَ أَنِ افْتَتَحَ خَيْبَرَ، فَقَسَمَ لَنَا، وَلَمْ يَقْسِمْ لأَحَدٍ لَمْ يَشْهَدِ الْفَتْحَ غَيْرَنَا‏.‏
Narrated Abu Musa:We came upon the Prophet (ﷺ) after he had conquered Khaibar. He then gave us a share (from the booty), but apart from us he did not give to anybody else who did not attend the Conquest

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।