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सहीह बुख़ारी

नंबर 4228

नंबर 4228किताब 64, नंबर 266
حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ إِسْحَاقَ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَابِقٍ، حَدَّثَنَا زَائِدَةُ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ قَسَمَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَوْمَ خَيْبَرَ لِلْفَرَسِ سَهْمَيْنِ، وَلِلرَّاجِلِ سَهْمًا‏.‏ قَالَ فَسَّرَهُ نَافِعٌ فَقَالَ إِذَا كَانَ مَعَ الرَّجُلِ فَرَسٌ فَلَهُ ثَلاَثَةُ أَسْهُمٍ، فَإِنْ لَمْ يَكُنْ لَهُ فَرَسٌ فَلَهُ سَهْمٌ‏.‏
Narrated Ibn `Umar:On the day of Khaibar, Allah's Messenger (ﷺ) divided (the war booty of Khaibar) with the ratio of two shares for the horse and one-share for the foot soldier. (The sub-narrator, Nafi` explained this, saying, "If a man had a horse, he was given three shares and if he had no horse, then he was given one share)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।