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सहीह बुख़ारी

नंबर 4212

नंबर 4212किताब 64, नंबर 252
حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، قَالَ حَدَّثَنِي أَخِي، عَنْ سُلَيْمَانَ، عَنْ يَحْيَى، عَنْ حُمَيْدٍ الطَّوِيلِ، سَمِعَ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ ـ رضى الله عنه أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم أَقَامَ عَلَى صَفِيَّةَ بِنْتِ حُيَىٍّ، بِطَرِيقِ خَيْبَرَ ثَلاَثَةَ أَيَّامٍ، حَتَّى أَعْرَسَ بِهَا، وَكَانَتْ فِيمَنْ ضُرِبَ عَلَيْهَا الْحِجَابُ‏.‏
Narrated Anas bin Malik:The Prophet (ﷺ) stayed with Safiya bint Huyai for three days on the way of Khaibar where he consummated his marriage with her. Safiya was amongst those who were ordered to use a veil

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।