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सहीह बुख़ारी

नंबर 4208

नंबर 4208किताब 64, नंबर 248
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَعِيدٍ الْخُزَاعِيُّ، حَدَّثَنَا زِيَادُ بْنُ الرَّبِيعِ، عَنْ أَبِي عِمْرَانَ، قَالَ نَظَرَ أَنَسٌ إِلَى النَّاسِ يَوْمَ الْجُمُعَةِ، فَرَأَى طَيَالِسَةً فَقَالَ كَأَنَّهُمُ السَّاعَةَ يَهُودُ خَيْبَرَ‏.‏
Narrated Abu `Imran:Anas looked at the people wearing Tailsans (i.e. a special kind of head covering worn by Jews in old days). On that Anas said, "At this moment they (i.e. those people) look like the Jews of Khaibar

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।