सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 4170

नंबर 4170किताब 64, नंबर 212
حَدَّثَنِي أَحْمَدُ بْنُ إِشْكَابٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ، عَنِ الْعَلاَءِ بْنِ الْمُسَيَّبِ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ لَقِيتُ الْبَرَاءَ بْنَ عَازِبٍ ـ رضى الله عنهما ـ فَقُلْتُ طُوبَى لَكَ صَحِبْتَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم وَبَايَعْتَهُ تَحْتَ الشَّجَرَةِ‏.‏ فَقَالَ يَا ابْنَ أَخِي إِنَّكَ لاَ تَدْرِي مَا أَحْدَثْنَا بَعْدَهُ‏.‏
Narrated Al-Musaiyab:I met Al-Bara bin `Azib and said (to him). "May you live prosperously! You enjoyed the company of the Prophet (ﷺ) and gave him the Pledge of allegiance (of Al-Hudaibiya) under the Tree." On that, Al- Bara' said, "O my nephew! You do not know what we have done after him (i.e. his death)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।