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सहीह बुख़ारी

नंबर 4153

नंबर 4153किताब 64, नंबर 197
حَدَّثَنَا الصَّلْتُ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ، عَنْ سَعِيدٍ، عَنْ قَتَادَةَ، قُلْتُ لِسَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ بَلَغَنِي أَنَّ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ، كَانَ يَقُولُ كَانُوا أَرْبَعَ عَشْرَةَ مِائَةً‏.‏ فَقَالَ لِي سَعِيدٌ حَدَّثَنِي جَابِرٌ كَانُوا خَمْسَ عَشْرَةَ مِائَةً الَّذِينَ بَايَعُوا النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَوْمَ الْحُدَيْبِيَةِ‏.‏ تَابَعَهُ أَبُو دَاوُدَ حَدَّثَنَا قُرَّةُ عَنْ قَتَادَةَ
Narrated Qatada:I said to Sa`id bin Al-Musaiyab, "I have been informed that Jabir bin `Abdullah said that the number (of Al-Hudaibiya Muslim warriors) was 1400." Sa`id said to me, "Jabir narrated to me that they were 1500 who gave the Pledge of allegiance to the Prophet (ﷺ) on the day of Al-Hudaibiya

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।