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सहीह बुख़ारी

नंबर 4115

नंबर 4115किताब 64, नंबर 159
حَدَّثَنَا مُحَمَّدٌ، أَخْبَرَنَا الْفَزَارِيُّ، وَعَبْدَةُ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ أَبِي خَالِدٍ، قَالَ سَمِعْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ أَبِي أَوْفَى ـ رضى الله عنهما ـ يَقُولُ دَعَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَلَى الأَحْزَابِ فَقَالَ ‏ "‏ اللَّهُمَّ مُنْزِلَ الْكِتَابِ، سَرِيعَ الْحِسَابِ، اهْزِمِ الأَحْزَابَ، اللَّهُمَّ اهْزِمْهُمْ وَزَلْزِلْهُمْ ‏"‏‏.‏
Narrated `Abdullah bin Abi `Aufa:Allah's Messenger (ﷺ) invoked evil upon the clans saying, "Allah, the Revealer of the Holy Book (i.e. the Qur'an), the Quick Taker of the accounts! Please defeat the clans. O Allah! Defeat them and shake them

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।