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सहीह बुख़ारी

नंबर 4094

नंबर 4094किताब 64, नंबर 138
حَدَّثَنَا مُحَمَّدٌ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ، أَخْبَرَنَا سُلَيْمَانُ التَّيْمِيُّ، عَنْ أَبِي مِجْلَزٍ، عَنْ أَنَسٍ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ قَنَتَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم بَعْدَ الرُّكُوعِ شَهْرًا يَدْعُو عَلَى رِعْلٍ وَذَكْوَانَ وَيَقُولُ ‏ "‏ عُصَيَّةُ عَصَتِ اللَّهَ وَرَسُولَهُ ‏"‏‏.‏
Narrated Anas:The Prophet (ﷺ) said Al-Qunut after Bowing (i.e. Ar-Ruku') for one month, invoking evil upon (the tribes of) Ril and Dhakwan. He used to say, "Usaiya disobeyed Allah and His Apostle

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।