وَعَنْ حَنْظَلَةَ بْنِ أَبِي سُفْيَانَ، سَمِعْتُ سَالِمَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ، يَقُولُ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَدْعُو عَلَى صَفْوَانَ بْنِ أُمَيَّةَ وَسُهَيْلِ بْنِ عَمْرٍو وَالْحَارِثِ بْنِ هِشَامٍ فَنَزَلَتْ {لَيْسَ لَكَ مِنَ الأَمْرِ شَىْءٌ} إِلَى قَوْلِهِ {فَإِنَّهُمْ ظَالِمُونَ}.
Salim bin `Abdullah said' "Allah's Messenger (ﷺ) used to invoke evil upon Safwan bin Umaiya, Suhail bin `Amr and Al-Harith bin Hisham. So the Verse was revealed:-- "Not for you (O Muhammad!)......(till the end of Verse) For they are indeed wrong-doers
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।