حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي الأَسْوَدِ، حَدَّثَنَا مُعْتَمِرٌ، عَنْ أَبِيهِ، سَمِعْتُ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ ـ رضى الله عنه قَالَ كَانَ الرَّجُلُ يَجْعَلُ لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم النَّخَلاَتِ حَتَّى افْتَتَحَ قُرَيْظَةَ وَالنَّضِيرَ، فَكَانَ بَعْدَ ذَلِكَ يَرُدُّ عَلَيْهِمْ.
Narrated Anas bin Malik:Some people used to allot some date palm trees to the Prophet (ﷺ) as gift till he conquered Banu Quraiza and Bani An-Nadir, where upon he started returning their date palms to them
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।