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सहीह बुख़ारी

नंबर 4009

नंबर 4009किताब 64, नंबर 60
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ بُكَيْرٍ، حَدَّثَنَا اللَّيْثُ، عَنْ عُقَيْلٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، أَخْبَرَنِي مَحْمُودُ بْنُ الرَّبِيعِ، أَنَّ عِتْبَانَ بْنَ مَالِكٍ، وَكَانَ، مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم مِمَّنْ شَهِدَ بَدْرًا مِنَ الأَنْصَارِ أَنَّهُ أَتَى رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم‏.‏
Narrated Mahmud bin Ar-Rabi:That `Itban bin Malik who was one of the companions of the Prophet (ﷺ) and one of the warriors of Badr, came to Allah's Messenger (ﷺ)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।