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सहीह बुख़ारी

नंबर 3960

नंबर 3960किताब 64, नंबर 12
حَدَّثَنِي عَمْرُو بْنُ خَالِدٍ، حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ، حَدَّثَنَا أَبُو إِسْحَاقَ، عَنْ عَمْرِو بْنِ مَيْمُونٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ اسْتَقْبَلَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم الْكَعْبَةَ فَدَعَا عَلَى نَفَرٍ مِنْ قُرَيْشٍ، عَلَى شَيْبَةَ بْنِ رَبِيعَةَ، وَعُتْبَةَ بْنِ رَبِيعَةَ وَالْوَلِيدِ بْنِ عُتْبَةَ، وَأَبِي جَهْلِ بْنِ هِشَامٍ‏.‏ فَأَشْهَدُ بِاللَّهِ لَقَدْ رَأَيْتُهُمْ صَرْعَى، قَدْ غَيَّرَتْهُمُ الشَّمْسُ، وَكَانَ يَوْمًا حَارًّا‏.‏
Narrated `Abdullah bin Mas`ud:The Prophet (ﷺ) faced the Ka`ba and invoked evil on some people of Quraish, on Shaiba bin Rabi`a, `Utba bin Rabi`a, Al-Walid bin `Utba and Abu Jahl bin Hisham. I bear witness, by Allah, that I saw them all dead, putrefied by the sun as that day was a very hot day

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 64 · Military Expeditions led by the Prophet (pbuh) (Al-Maghaazi)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।