सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 3935

नंबर 3935किताब 63, नंबर 160
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ، حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ فُرِضَتِ الصَّلاَةُ رَكْعَتَيْنِ، ثُمَّ هَاجَرَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَفُرِضَتْ أَرْبَعًا، وَتُرِكَتْ صَلاَةُ السَّفَرِ عَلَى الأُولَى‏.‏ تَابَعَهُ عَبْدُ الرَّزَّاقِ عَنْ مَعْمَرٍ‏.‏
Narrated `Aisha:Originally, two rak`at were prescribed in every prayer. When the Prophet (ﷺ) migrated (to Medina) four rak`at were enjoined, while the journey prayer remained unchanged(i.e. two rak`at)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 63 · Merits of the Helpers in Madinah (Ansaar)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।