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सहीह बुख़ारी

नंबर 3920

नंबर 3920किताब 63, नंबर 145
وَقَالَ دُحَيْمٌ حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ، حَدَّثَنَا الأَوْزَاعِيُّ، حَدَّثَنِي أَبُو عُبَيْدٍ، عَنْ عُقْبَةَ بْنِ وَسَّاجٍ، حَدَّثَنِي أَنَسُ بْنُ مَالِكٍ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ قَدِمَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم الْمَدِينَةَ، فَكَانَ أَسَنَّ أَصْحَابِهِ أَبُو بَكْرٍ، فَغَلَفَهَا بِالْحِنَّاءِ وَالْكَتَمِ حَتَّى قَنَأَ لَوْنُهَا‏.‏
Through another group of narrators, Anas bin Malik said: "When the Prophet (ﷺ) arrived at Medina, the eldest amongst his companions was Abu Bakr. He dyed his hair with Hinna and Katam till it became of dark red color

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 63 · Merits of the Helpers in Madinah (Ansaar)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।