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सहीह बुख़ारी

नंबर 3874

नंबर 3874किताब 63, नंबर 99
حَدَّثَنَا الْحُمَيْدِيُّ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ سَعِيدٍ السَّعِيدِيُّ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أُمِّ خَالِدٍ بِنْتِ خَالِدٍ، قَالَتْ قَدِمْتُ مِنْ أَرْضِ الْحَبَشَةِ وَأَنَا جُوَيْرِيَةٌ، فَكَسَانِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم خَمِيصَةً لَهَا أَعْلاَمٌ، فَجَعَلَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَمْسَحُ الأَعْلاَمَ بِيَدِهِ وَيَقُولُ ‏ "‏ سَنَاهْ، سَنَاهْ ‏"‏‏.‏ قَالَ الْحُمَيْدِيُّ يَعْنِي حَسَنٌ حَسَنٌ‏.‏
Narrated Um Khalid bint Khalid:When I came from Ethiopia (to Medina), I was a young girl. Allah's Messenger (ﷺ) made me wear a sheet having marks on it. Allah's Messenger (ﷺ) was rubbing those marks with his hands saying, "Sanah! Sanah!" (i.e. good, good)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 63 · Merits of the Helpers in Madinah (Ansaar)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।