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सहीह बुख़ारी

नंबर 3869

नंबर 3869किताब 63, नंबर 94
حَدَّثَنَا عَبْدَانُ، عَنْ أَبِي حَمْزَةَ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ أَبِي مَعْمَرٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ انْشَقَّ الْقَمَرُ وَنَحْنُ مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِمِنًى فَقَالَ ‏ "‏ اشْهَدُوا ‏"‏‏.‏ وَذَهَبَتْ فِرْقَةٌ نَحْوَ الْجَبَلِ وَقَالَ أَبُو الضُّحَى عَنْ مَسْرُوقٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ انْشَقَّ بِمَكَّةَ‏.‏ وَتَابَعَهُ مُحَمَّدُ بْنُ مُسْلِمٍ عَنِ ابْنِ أَبِي نَجِيحٍ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ أَبِي مَعْمَرٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ‏.‏
Narrated `Abdullah:The moon was split ( into two pieces ) while we were with the Prophet (ﷺ) in Mina. He said, "Be witnesses." Then a Piece of the moon went towards the mountain

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 63 · Merits of the Helpers in Madinah (Ansaar)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।