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सहीह बुख़ारी

नंबर 3863

नंबर 3863किताब 63, नंबर 88
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ كَثِيرٍ، أَخْبَرَنَا سُفْيَانُ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ أَبِي خَالِدٍ، عَنْ قَيْسِ بْنِ أَبِي حَازِمٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ مَا زِلْنَا أَعِزَّةً مُنْذُ أَسْلَمَ عُمَرُ‏.‏
Narrated `Abdullah bin Mas'ud:We have been powerful since `Umar embraced Islam

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 63 · Merits of the Helpers in Madinah (Ansaar)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।